नई दिल्ली, रोजाना भास्कर ब्यूरो: Supreme Court of India ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने पर व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का संवैधानिक दर्जा खो देता है। अदालत ने Andhra Pradesh High Court के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति एससी श्रेणी के लाभ का हकदार नहीं रह जाता।

यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और पादरी के रूप में कार्य कर रहा था। उसने कुछ लोगों के खिलाफ Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत केस दर्ज कराया था। आरोपियों ने दलील दी कि धर्म परिवर्तन के बाद वह एससी-एसटी कानून के तहत संरक्षण पाने का पात्र नहीं है।
30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था मान्य नहीं है, इसलिए धर्मांतरण के बाद संबंधित व्यक्ति एससी-एसटी एक्ट के लाभ का दावा नहीं कर सकता। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि अपीलकर्ता लंबे समय से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है और नियमित रूप से धार्मिक गतिविधियों में संलग्न है। ऐसे में घटना के समय वह ईसाई था और संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत उसे एससी का दर्जा नहीं मिल सकता।
यह फैसला धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े मामलों में भविष्य की कानूनी व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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