फोर्टिस अस्पताल में नौकरी से इनकार पर किन्नर का हंगामा: “पहले बुलाया, फिर पहचान के आधार पर ठुकराया”

जालंधर, रोजाना भास्कर (हरीश शर्मा): पठानकोट चौक के पास स्थित फोर्टिस अस्पताल में उस समय हंगामा हो गया, जब 12वीं पास किन्नर गरजोया ने अस्पताल प्रबंधन पर भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए। गरजोया का दावा है कि पहले उन्हें नौकरी के लिए बुलाया गया, लेकिन बाद में किन्नर होने के कारण काम देने से मना कर दिया गया।

गरजोया, जो बस्ती शेख की निवासी हैं, ने बताया कि उन्होंने करीब दो महीने पहले अस्पताल में आवेदन किया था। आरोप है कि दीपक नामक व्यक्ति ने उनका नंबर लेकर नौकरी का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में आपत्तिजनक संदेश भेजने लगा। परेशान होकर उन्होंने उस समय काम करने से मना कर दिया।

 मैनेजमेंट बदलने के बाद फिर बुलावा

गरजोया के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन में बदलाव के बाद उन्हें दोबारा हाउसकीपिंग इंचार्ज ने दस्तावेजों सहित बुलाया। उन्हें वॉशरूम क्लीनिंग का कार्य प्रस्तावित किया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। उनका कहना है कि वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए कोई भी काम करने को तैयार थीं।

“यहां किन्नर काम नहीं कर सकते” — आरोप

गरजोया का आरोप है कि जॉइनिंग के समय स्टाफ ने यह कहकर बाहर कर दिया कि यहां वैकेंसी नहीं है और अस्पताल के माहौल में किन्नर काम नहीं कर सकते। उन्होंने इसे पहचान के आधार पर भेदभाव और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया।

गरजोया ने ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 का हवाला देते हुए कहा कि कानून उन्हें किसी भी संस्थान में समान अवसर का अधिकार देता है। उन्होंने कहा, “जब हम भीख मांगते हैं तो समाज विरोध करता है, और जब नौकरी करना चाहते हैं तो दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं।”

पुलिस में शिकायत की चेतावनी

गरजोया ने चेतावनी दी है कि वे इस मामले की शिकायत पुलिस प्रशासन से करेंगी। उनका आरोप है कि निचला स्टाफ मनमानी करता है और उच्च अधिकारियों तक सही जानकारी नहीं पहुंचाई जाती।

फिलहाल, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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