लघु उद्योग भारती ने केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत किया

एम एस एम ई केंद्रित सुधारों और वैश्विक क्षमता निर्माण के प्रति दृष्टिकोण सराहनीय – मधु सूदन दादू

बजट वैश्विक स्तर पर क्षमता निर्माण का बजट है, जहाँ सशक्त एमएसएमई देश की आर्थिकता को मजबूत करेगा- अरविंद धूमल

लघु उद्योग भारती के सुझावों को मिला समुचित समर्थन- विक्रान्त शर्मा

जालंधर, रोजाना भास्कर (हरीश शर्मा): लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन दादू, उपाध्यक्ष एडवोकेट अरविंद धूमल व महासचिव ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया है, इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के दूसरे इंजन के रूप में मान्यता दी गई है।

उक्त जानकारी देते हुए मास कम्युनिकेशन बोर्ड उत्तर पश्चिम क्षेत्र प्रमुख विक्रान्त शर्मा ने बताया कि लघु उद्योग भारती, जो भारत में सूक्ष्म, और लघु उद्यमों का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख संगठन है, ने केंद्रीय बजट को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने के प्रति सकारात्मक इरादे को दर्शाते हैं।

उक्त बजट में लघु उद्योग भारती के सुझावों को मिला समुचित समर्थन मिला है। यह बजट राष्ट्रीय कर्तव्यों और समावेशी आर्थिक विकास के प्रति सरकार की दृढ प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

टी आर ई डी एस को बी ई एम पोर्टल से जोडऩा, जिससे एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओ को समय पर भुगतान, बेहतर नकदी प्रवाह और बकाया राशि की शीघ्र प्राप्ति सुनिश्चित होगी।

लखपति महिला योजना, जी महिला उद्यमिता को सशक्त बनाने पारिवारिक आय बढ़ाने और महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई के विस्तार में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

मधु सूदन दादू के अनुसार एम एस एम ई केंद्रित सुधारों और वैश्विक क्षमता निर्माण के प्रति दृष्टिकोण सराहनीय है। क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से संबंधित प्रतिबंधों एवं आदेशों का युक्तिकरण से भारतीय एमएसएमई की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी तथा अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होगा।

एडवोकेट अरविंद धूमल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर क्षमता निर्माण का बजट है, जहाँ सशक्त एमएसएमई देश की आर्थिकता को मजबूत करेगा यह बजट एमएसएमई की दीर्घकालिक ऋण समस्याओं का समग्र समाधान प्रस्तुत करता है।

10 हज़ार करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड जिससे उच्च क्षमता वाले एमएसएमई को इक्विटी सहायता मिलेगी और वे राष्ट्रीय एवं वैधिक स्तर पर आगे बढ़ सकेंगे।

सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड में 2 हज़ार रुपए करोड़ की अतिरिक्त पूंजी, जिससे सूक्ष्म उद्यमों को डॉटर फंड के माध्यम से समर्थन मिलेगा। डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट मॉडल जो लेन-देन और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर ऋण मूल्यांकन करेगा तथा गिरवी पर निर्भरता कम करेगा।

विक्रान्त शर्मा ने कहा कि लघु उद्योग भारती के सुझावों को मिला समुचित समर्थन मिला है। सीपीएसई के लिए टीआरईडीएस पर अनिवार्य ऑनबोर्डिंग, जिससे एमएसएमई को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा।

लघु उद्योग भारती विनिर्माण आधारित विकास पर दिए गए विशेष बल का स्वागत करता है। 200 परंपरागत औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार, सिटी इकोनॉमिक रीजन विकास से औद्योगिक नीति और शहरी नियोजन का एकीकरण होगा। 10 हज़ार करोड़ का कंटेनर एवं उपकरण विनिर्माण प्रोत्साहन, जिससे आयात निर्भरता कम होगी और लॉजिस्टिक्स ढांचा मजबूत होगा।

ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि कोपर्पोरेट मित्र योजना, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के अनुपालन व्यय को कम करने में सहायक होगी। सीमा शुल्क का युक्तिकरण, उलटी शुल्क संरचना में सुधार तथा तेज जीएसटी रिफंड, जिससे कार्यशील पूंजी मुक्त होगी।

बैंकिंग सुधारों हेतु उच्चस्तरीय समिति की घोषणा से बैंकिंग प्रक्रियाओं के युक्तिकरण, दस्तावेजीकरण में सरलता तथा एमएसएमई-अनुकूल ऋण प्रणाली को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।

लघु उद्योग भारती इस समिति में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग करता है, ताकि जमीनी स्तर की एमएसएमई वास्तविकताओं को नीतिगत निर्णयों में शामिल किया जा सके। यह समग्र दृष्टिकोण “सक्षम भारत” के निर्माण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एक ऐसा भारत जो सक्षम, कुशल, नवाचारी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी हो। लघु उद्योग भारती का दृढ़ विश्वास है कि यह बजट वैश्विक स्तर पर क्षमता निर्माण का बजट है, जो भारत को एक विनिर्माण महाशक्ति, निर्यात अग्रणी और 2047 तक विश्वगुरु भारत के रूप में स्थापित करने की मजबूत नीव रखता है जहाँ सशक्त एमएसएमई, मजबूत विनिर्माण, कुशल मानव संसाधन और विश्वास-आधारित शासन मुख्य आधार होंगे।

लघु उद्योग भारती इन परिवर्तनकारी उपायों के प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन हेतु भारत सरकार के साथ निरंतर रचनात्मक सहभागिता की अपेक्षा करता है।