वैश्विक संकट के बीच बड़ा फैसला: आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू, तेल-गैस कंपनियों को डेटा साझा करना अनिवार्य

नई दिल्ली/जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल-गैस की अनिश्चितता को देखते हुए केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाते हुए Essential Commodities Act लागू कर दिया है। इसके तहत पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से जुड़ी सभी कंपनियों को अब सरकार के Petroleum Planning and Analysis Cell (पीपीएसी) के साथ नियमित और ताज़ा डेटा साझा करना होगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma के अनुसार, अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी अधिसूचना में पीपीएसी को डेटा संग्रह, संकलन और विश्लेषण की अधिकृत एजेंसी बनाया गया है। इससे आपात परिस्थितियों में सरकार को आपूर्ति, भंडारण और वितरण की प्रभावी योजना बनाने में मदद मिलेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदेशों का उल्लंघन दंडनीय अपराध होगा, जिसमें कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान है। यह कानून जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी पर रोक लगाने के लिए सरकार को व्यापक अधिकार देता है।

जरूरत पड़ने पर स्टॉक सीमा तय करने और व्यापार को विनियमित करने की शक्ति भी इसी अधिनियम के तहत मिलती है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और रूस, अमेरिका, वेनेजुएला सहित लगभग 40 देशों से कच्चा तेल मंगाता है, जबकि प्राकृतिक गैस अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस से आयात की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह कदम देश में ईंधन और गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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