जालंधर में युवती से कथित छेड़छाड़ व हाथापाई का मामला, प्रभावशाली प्रॉपर्टी कारोबारी के बेटे पर आरोप

जालंधर रोज़ाना भास्कर(हरीश शर्मा): जालंधर में एक युवती के साथ कथित छेड़छाड़ और हाथापाई का मामला सामने आया है।शहर के एक चर्चित प्रॉपर्टी कारोबारी के बेटे पर आरोप है कि उसने पीपीआर मार्केट के पास राह से गुजर रही एक युवती को रोककर उससे आपत्तिजनक टिप्पणी की और कथित रूप से उसे जबरन कार में बैठाने की कोशिश की।

विरोध करने पर दोनों के बीच हाथापाई होने की बात भी सामने आई है।जब इस मामले की सूचना संबंधित थाने में पहुँची तो वहां प्रभावशाली लोगों के दबाव के चलते मामले में कार्रवाई करने के बजाय युवती से समझौता करवा दिया गया। यह भी आरोप है कि युवती की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

पीपीआर मार्केट में घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में आरोपी और युवती के बीच कथित हाथापाई दिखाई देने की बात कही जा रही है।

सूत्र यह भी दावा करते हैं कि इसी परिवार के बेटे पर करीब 15 वर्ष पहले जीटीबी नगर क्षेत्र में भी एक युवती से छेड़छाड़ के आरोप लगे थे। उस समय भी मामला समझौते के जरिए सुलझ जाने की बात कही जाती है। रोज़ाना भास्कर इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।

क्या महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा पर गंभीर सवाल नहीं उठते?

यदि किसी महिला के साथ सार्वजनिक स्थान पर कथित रूप से अभद्र व्यवहार, छेड़छाड़ या जबरन वाहन में बैठाने की कोशिश जैसे आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

यदि किसी मामले में समझौता प्रभाव, दबाव या आर्थिक शक्ति के कारण हुआ हो, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पीड़ित पक्ष की शिकायत को पूरी गंभीरता से सुना जाए और किसी भी प्रकार का दबाव न हो।

यदि संबंधित थाने में महिला अधिकारी होने के बावजूद पीड़िता को न्याय नहीं मिलने की शिकायत सामने आती है, तो ऐसे आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि क्या किसी बड़ी और गंभीर घटना का इंतज़ार करने के बजाय ऐसे मामलों में समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?

यदि इस मामले में पुलिस निष्पक्ष जांच करती है और सीसीटीवी फुटेज, शिकायत तथा अन्य साक्ष्यों की विधिवत जांच होती है, तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है।