RTI एक्सपोर्ट रवि छाबड़ा ने की कारपोरेशन व विजिलेंस में शिकायत
बिना अनुमति सीवरेज और पानी का कनेक्शन सड़क तोड़ कर लेना
जालंधर में अवैध निर्माण पर उठे सवाल, सैनिट्री मार्केट की गली में रातों-रात खड़ी हुई दो मंजिला व्यावसायिक इमारत
जालंधर (रोज़ाना भास्कर): शहर के व्यस्ततम शहीद भगत सिंह चौक के निकट सैनिट्री मार्केट के नाम से मशहूर गली में, शिव मंदिर से पहले स्थित मोहल्ला बक्रम बक्श में कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर अवैध निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां रातों-रात किंग सेनेट्री की दुकान का निर्माण कर उसे इस तरह तैयार किया गया कि मानो वहां कोई नया निर्माण हुआ ही न हो। दुकान के शटरों पर तुरंत पेंट और गीले में ही अंदर माल लगा कर शोरूम त्यार कर दिए जाने से भी लोगों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कम कीमत पर खरीदे गए पुराने मकानों को तोड़कर उनके स्थान पर व्यावसायिक उपयोग के लिए दो मंजिला इमारत तैयार कर दी गई। नगर निगम की आंखों में धूल झोंकने वाले किंग सेनेट्री के मालिक इस कदर सरकार को चुना लगा गये बिना स्वीकृत नक्शे और आवश्यक अनुमति के रातो रात शोरूम त्यार कर गए।
ऐसा लगता है इस के पीछे भी किसी बड़े नेता का हाथ लगता है। इससे नगर निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, जांच की मांग तेज

मामले की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र के दुकानदारों और निवासियों ने निर्माण की वैधता की जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत हुआ है तो नगर निगम को निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।
अब सबकी निगाहें नगर निगम और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी या फिर यह मामला भी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा।
अवैध निर्माण होने की स्थिति में क्या हो सकती है कार्रवाई?
यदि जांच में निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे या नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1976 के प्रावधानों के तहत नगर निगम निम्नलिखित कार्रवाई कर सकता है—
* स्टॉप-वर्क और कारण बताओ नोटिस जारी करना।
* भवन या उसके अवैध हिस्से को सील करना।
* अवैध निर्माण हटाने के आदेश जारी करना तथा आवश्यकता पड़ने पर निगम द्वारा ध्वस्तीकरण (बुलडोजर) की कार्रवाई करना।
* ध्वस्तीकरण का खर्च भवन मालिक से वसूलना।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
यदि शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं की गई हो, तो विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस, निलंबन या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, यदि किसी प्रकार की मिलीभगत या भ्रष्टाचार के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो सक्षम एजेंसियों द्वारा आगे की जांच भी की जा सकती है।














