अकाली दल के यह नेता उतरे विरोध में, एक सप्ताह का अटवाल व सुखबीर को अलटीमेटम, अकाली दल की राजनीति गर्मायी अटवाल के ​लिए खड़ी हो गयी नई मुसीबत

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जालंधर (हरीश शर्मा). लोकसभा चुनाव के मतदान की तिथी निकट आती जा रही है और तमाम राजनीतिक पार्टियों में गर्मी बढती जा रही है। जालंधर में अकाली दल के प्रत्याशी चरणजीत सिंह अटवाल के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गयी है। कारण यह है कि टकसाली अकाली ढेसी परिवार व कैंट के कई गांवों के लोगों ने इलाके के इंचार्ज पूर्व सर्बजीत सिंह मक्कड़ के खिलाफ बिगुल बजा दिया है।

रविवार को गांव रायपुर में ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन परमजीत सिंह रायपुर की अध्यक्षता में मीटिंग हुई जिसमें कई अकाली नेता शरीक हुए, जिसमें यूके से जसपाल सिंह ढेसी , गांव सलारपुर की सरपंच शरणजीत कौर , सरदारा सिंह, रायपुर की सरपंच सर्बजीत कौर, पूर्व सरपंच जोगिंदर सिंह खालसा, रेशम लाल व बलवीर सिंह पंच, राजा पंच, अजीत सिंह संघा, सतपाल सिंह पनेसर, पूर्व सरपंच हुसन लाल, संतोख सिंह, गुरदेव राम,पंच हरबंस सिंह,बलजीत कौर, पुरषोत्म सिंह, तीर्थ सिंह, पूर्व सरपंच बिट्टू समेत भारी संख्या में अकाली दल के वर्कर शरीक हुए। इस दौरान नेतओं ने कहा कि कैंट विधानसभा हलके में पिछले 12 सालों से परमजीत सिंह रायपुर व ढेसी परिवार को दरकिनार किया जा रहा है। उलटा जिस नेता को कैंट विधानसभा हलके की जिम्मेदारी शिअद ने दे रखी है, उसने प्लाट पर कब्जा कर रखा है।

रायपुर ने बताया कि पूरा मामला सुखीबर व प्रकाश सिंह बादल के ध्यान में लेकर आए थे। हाल ही में सुखबीर बादल ने जालंधर अकाली दल के प्रधान व विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला व पूर्व मंत्री डॉ, दलजीत चीमा के नेतृत्व में कमेटी बना रखी है, जिसने प्लाट के झगड़े का निपटारा करना था लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

एनआरआई जसपाल ढेसी व रायपुर ने कहा कि अगर एक सप्ताह में मक्कड़ से उनका कब्जा नहीं छुड़वाया गया तो वह आदमपुर में भी टकसाली अकाली नेताओं को एक मंच पर जमा करेंगे । फगवाड़ा में भी वर्करों को जमा किया जाएगा और अगला फैसला लिया जाएगा। उनको ऐसा नेता अपने सिर पर मंजूर नहीं है, जिसने उनकी जमीन पर कब्जा कर रखा हो। एक सप्ताह तक तमाम नेता व वर्कर जालंधर से​ शिअद प्रत्याशी चरणजीत सिंह अटवाल का प्रचार नहीं करेंगे और न ही लोगों को प्रेरित करेंगे। एक सप्ताह बाद फैसला लिया जाएगा।