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कांग्रेस के लिए मुश्किल होती जा रही है जालंधर की सीट.. पढिए रोजाना भास्कर की खास रिपोर्ट….

जालंधर रोज़ाना भास्कर.(हरीश शर्मा)चौधरी संतोख सिंह की गांवों में स्थिति डगमगाने लगी है । जालंधर लोकसभा के अधीन शाहकोट फिल्लौर नकोदर आदमपुर करतारपुर विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जो ग्रामीण इलाकों में है ।इनमें से फिल्लौर नकोदर आदमपुर में पहले ही अकाली दल के विधायक है ऐसे में चौधरी संतोख सिंह को गांवों में काफी चुनौती मिल रही है ।दूसरी बात यह है गांव में बसपा का कैडर एक मंच पर आ रहा है जिससे कांग्रेस का ग्राफ दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है पहले की कयास लगाए जा रहे थे कि चौधरी संतोख सिंह कम से कम 100000 मतों से जालंधर की लोकसभा सीट राम से जीत जाएंगे लेकिन जैसे-जैसे मतदान की तिथि निकट आ रही है वैसे ही चौधरी का ग्राफ बढ़ने के स्थान पर कम होता जा रहा है ।नकोदर से कुलदीप सिंह वडाला का बेटा गुरप्रताप सिंह मौजूदा विधायक है शिरोमणि अकाली दल बादल का प्रधान भी है ऐसे में वह पूरा दमखम लगा रहे हैं और उनकी कोशिश है नकोदर से ज्यादा से ज्यादा वोट डालवायी जा सके दूसरा आदमपुर से पवन कुमार टीनू अकाली दल के विधायक है ।रविदासिया समाज से हैं और उनकी कोशिश है किसी तरह अधिक से अधिक वोट अकाली दल के उम्मीदवार चरणजीत सिंह अटवाल को दिलाई जाए ।इसी तरह से करतारपुर में आप का चुनाव लड़ चुके चंदन ग्रेवाल भी अब अकाली दल की तगड़ी में आकर बैठ गए हैं गांव में तेजी से अकाली दल का ग्राफ बढ़ने लगा है जो कांग्रेस के लिए चिंताजनक है ।चरणजीत सिंह अटवाल ने भी अपनी रणनीति में कुछ बदलाव किया है उन्होंने जालंधर सिटी एरिया में मोदी के नाम पर वोट मांगने शुरू कर दिए हैं ताकि शहरी हिंदू उनको वोट देने से गुरेज ने करें वहीं गांव में अकाली दल तेजी से आगे बढ़ रहा है ऐसे में जहां कांग्रेसी सीट को पहले बहुत आसान समझ रही थी वहीं अब कांटे की टक्कर होती जा रही है ।कांग्रेस के लिए चिंताजनक बात यह भी है कि चौधरी संतोख सिंह के गढ जाने वाले फिल्लौर में भी उनके पांव नहीं जम रहे हैं उनका जबरदस्त विरोध हो रहा है ।ऐसे में यह विरोध अगले 4 दिन तक चला तो कांग्रेस के लिए सीट उलटफेर हो सकती है ।कांग्रेस के मौजूदा लीडरों ने हाईकमान को इस बात से अवगत करवा दिया है कि अगर इस सीट को जीतना है तो काग्रेस को नई रणनीति तैयार करनी होगी लेकिन हाईकमान की तरफ से अभी कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं आए हैं ।जिससे कांग्रेस के नेता असमंजस की स्थिति में है ।चौधरी संतोख सिंह दिन में इतनी रैलियां वह मीटिंग करते हैं शाम को उनके खिलाफ मुर्दाबाद की वीडियो वायरल होती है और दिन भर की कमाई पर पानी फेर देती है ऐसा भी सामने आया है संतोख सिंह की मैनेजमेंट बिल्कुल गलत है और उनको कोई सही रास्ता दिखाने वाला नहीं है ।चौधरी संतोख सिंह उनका बेटा विक्रम चौधरी दोनों जीत के प्रति ओवर कॉन्फिडेंट थे जो खतरनाक साबित होता जा रहा है ।यह बात सारी कैप्टन को बतायी गई है कि अगले 7 दिन में कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलने ही होगी वरना सीट खतरे में पड़ सकती है।

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