जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो:
Jalandhar में स्थित Rattan Hospital के बाहर उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब एक बुजुर्ग महिला मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही और पैसों के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए।

72 वर्षीय गुरदेव कौर के बेटे हरकेश कुमार और अन्य परिजनों का दावा है कि उनकी माता अस्पताल में भर्ती होने के बाद सामान्य बातचीत कर रही थीं और खाना मांग रही थीं। परिवार के अनुसार, जैसे ही उन्होंने Ayushman Bharat Yojana (आयुष्मान कार्ड) के तहत मुफ्त इलाज की बात उठाई और फोन करवाया, 10-15 मिनट के भीतर मरीज को वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने जानबूझकर स्थिति को गंभीर दिखाया ताकि आयुष्मान कार्ड से इलाज से बचा जा सके या पैसों की मांग जारी रखी जा सके।
परिवार का यह भी कहना है कि अस्पताल लगातार पैसे जमा करवाने का दबाव बना रहा था। उनके साथ आए अमरीक सिंह ने आरोप लगाया कि मरीज को अब तक केवल एक बोतल चढ़ाई गई है, फिर भी भुगतान की मांग की जा रही है।
वहीं अस्पताल के पीआरओ नरिंदर कुमार ने सभी आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि मरीज पहले ही जालंधर के 15-20 अस्पतालों में दिखा चुकी थीं और उनकी हालत बेहद नाजुक थी। अस्पताल के अनुसार, दिल से जुड़ी जांच (NT-proBNP लेवल) में रिपोर्ट 35,000 आई, जबकि सामान्य स्तर करीब 300 होता है। पीआरओ का दावा है कि मरीज को कार्डियक अरेस्ट आया, जो उनकी गंभीर स्थिति के कारण हुआ।
फिलहाल मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है। घटना के बाद अस्पताल के बाहर तनावपूर्ण माहौल बना रहा और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
#Jalandhar #RattanHospital #AyushmanBharat #HospitalControversy #PunjabNews #PatientCare #HealthSystem














