जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो: Kotak Mahindra Bank की जालंधर शाखा के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बैंक की ग्राहक गीता वर्मा (खाता संख्या 8145413754) ने शाखा प्रबंधन, बैंक के सीनियर अधिकारियों, हेड ऑफिस और RBI तक शिकायत भेजकर बैंक स्टाफ पर धोखाधड़ी और ग्राहक विश्वास के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

बताया जा रहा है कि यह शाखा विरसा विहार के सामने स्थित है और इसका IFSC कोड KKBK0000256 है। शिकायत में बैंक मैनेजर दिव्या, टेली कॉलर शिफाली, भावना और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
1.20 लाख रुपए निकालने पहुंची थी महिला
शिकायत के अनुसार, गीता वर्मा बैंक से 1,20,000 रुपये निकालने गई थीं। उन्होंने निकासी चेक भरकर बैंक कर्मचारी शिफाली को दिया। आरोप है कि उन्हें 50-50 हजार रुपये के दो बंडल और 10-10 हजार रुपये के दो अलग बंडल दिखाए गए।
कैश मशीन पर पूरी राशि दिखाई गई, लेकिन नकदी बैंक स्टाफ ने अपने पास ही रख ली और बाद में केवल रसीद देकर दूसरे कर्मचारी “नेहा” से क्लियर करवाने को कहा गया।
महिला का आरोप है कि इसी दौरान नकदी के बंडल बदल दिए गए। बैंक और उसके कर्मचारियों पर भरोसा होने के कारण उन्होंने पैसे लेकर दूसरे बैंक में जमा करवाने की कोशिश की, जहां पता चला कि रकम में 11 हजार रुपये कम हैं।
“बाकी पैसे बैंक में रह गए” कहकर बुलाया वापस
गीता वर्मा के अनुसार, जब उन्होंने बैंक कर्मचारी शिफाली को फोन किया तो उन्हें बताया गया कि बाकी राशि बैंक में ही रह गई है और वापस आकर ले जाएं। महिला ने सवाल उठाया कि अगर रकम बैंक में रह गई थी तो उन्हें पहले सूचित क्यों नहीं किया गया।
जब वह वापस शाखा पहुंचीं तो उन्होंने पहले दी गई नकदी लौटाई और रसीद के अनुसार पूरी राशि देने को कहा। बैंक कर्मचारियों ने कथित तौर पर गलती स्वीकार करते हुए पूरी राशि लौटाई, लेकिन महिला का आरोप है कि इसके बाद भी रकम में 1,000 रुपये कम निकले।
कैश मशीन और CCTV पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि बैंक की कैश गिनने वाली मशीनें वास्तविक रकम से अलग आंकड़े दिखा रही थीं। इसके बाद उन्हें शक हुआ कि उनके साथ लगातार धोखाधड़ी की कोशिश की जा रही है।
महिला ने शाखा प्रबंधक से शिकायत की, जिसके बाद उन्हें CCTV फुटेज दिखाने की बात कही गई। लेकिन आरोप है कि पूरी फुटेज नहीं दिखाई गई, जिससे उनके संदेह और बढ़ गए।
“बात रकम की नहीं, भरोसे की है”
गीता वर्मा ने अपनी शिकायत में कहा कि मामला केवल 1,000 रुपये का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो ग्राहक RBI की गाइडलाइंस के तहत बैंकों पर करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस घटना के कारण उनका पूरा दिन खराब हुआ, जरूरी असाइनमेंट्स प्रभावित हुए और बेटी को विदेश भेजने की प्रक्रिया में भी देरी हुई। इससे परिवार को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ी।
महिला ने RBI और बैंक प्रबंधन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि ग्राहकों का बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा बना रहे।














