“शहीदों को भूलकर नेताओं के स्मारक बने”: भगवंत मान का बड़ा हमला, भगत सिंह के सपनों का ‘रंगला पंजाब’ बनाने का संकल्प

खटकड़ कलां/चंडीगढ़, रोजाना भास्कर ब्यूरो (हरीश शर्मा): शहीद-ए-आज़म के शहीदी दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री ने तीखे राजनीतिक और भावनात्मक संदेश के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश में कई राजनीतिज्ञों ने अपने नेताओं के नाम पर भव्य स्मारक बनाए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर भगत सिंह भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती। अगर आज़ादी के बाद देश की बागडोर युवाओं को सौंपी जाती, तो भारत आज वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र होता।”

🕊️ शहीदों की विरासत और राजनीतिक संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में कुछ नहीं खोया, वे आज दावा करते हैं कि भारत 2014 में आज़ाद हुआ। उन्होंने इसे शहीदों के बलिदान का अपमान बताया।

उन्होंने कहा कि 23 मार्च केवल एक तारीख नहीं, बल्कि वह दिन है जब भगत सिंह, और ने मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए और आज़ादी की लड़ाई में नई चेतना भरी।

शहीदों के नाम पर पहचान की लड़ाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मोहाली हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने के लिए केंद्र सरकार से संघर्ष किया।

साथ ही, हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने के लिए केंद्र से बातचीत जारी है।

उन्होंने यह भी बताया कि 24.99 करोड़ रुपये की लागत से ‘हुसैनीवाला विरासत’ प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया है, जो शहीदों की स्मृति को समर्पित होगा।

शिक्षा ही असली बदलाव का रास्ता

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ही गरीबी और सामाजिक बुराइयों का स्थायी समाधान है।

अब तक 65,000 सरकारी नौकरियां दी गईं

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर

10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कार्ड, ताकि इलाज के लिए किसी को आर्थिक चिंता न हो

उन्होंने कहा, “कोई मुफ्त सुविधा गरीबी खत्म नहीं कर सकती, लेकिन शिक्षा लोगों को मजबूरी के चक्र से बाहर निकाल सकती है।”

वोट की ताकत और शहीदों का सपना

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपने वोट की कीमत समझें। उन्होंने कहा कि वोटर आईडी केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि शहीदों की कुर्बानी की निशानी है।

“जब आप वोट डालते हैं, तो समझिए कि यह अधिकार शहीदों की शहादत से मिला है। इसे कभी लालच या दबाव में बेचें नहीं।”

पंजाब का योगदान और ऐतिहासिक बलिदान

उन्होंने कहा कि देश की आबादी का केवल 2% होने के बावजूद, स्वतंत्रता संग्राम में फांसी या निर्वासन झेलने वाले 80% शहीद पंजाब से थे।

विभाजन के समय पंजाब ने सबसे अधिक पीड़ा झेली, लाखों लोगों ने जान और घर गंवाए।

चुनौतियां अभी बाकी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 75 साल बाद भी देश गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा से जूझ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है और सौहार्दपूर्ण, समानतावादी समाज का निर्माण करेगी।

 “रंगला पंजाब” का संकल्प

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के सपनों का पंजाब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

“हम अपने शहीदों की राह पर चलते हुए विकासोन्मुखी और जनहितैषी योजनाएं लागू कर रहे हैं। उनका सपना ही हमारी दिशा है।”

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