अंतरिक्ष में फिर भारत की बड़ी उड़ान, 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे उड़ान भरेगा GSLV-F17; EOS-05 को अंतरिक्ष में पहुंचाएगा

नई दिल्ली/श्रीहरिकोटा, रोजाना भास्कर ( ब्यूरो) : भारत एक बार फिर अंतरिक्ष में अपनी ताकत दिखाने को तैयार है। ISRO का GSLV-F17 रॉकेट EOS-05 उपग्रह को लेकर 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा। रॉकेट को 28 अगस्त को Vehicle Assembly Building से Umbilical Tower तक पहुंचाया जा चुका है। इस मिशन के जरिए भारत की अंतरिक्ष यात्रा एक और कदम आगे बढ़ेगी।

देशभर की नजरें अब इस लॉन्च पर टिकी हैं। ISRO ने इसकी लाइव स्ट्रीमिंग रात 2:25 बजे से शुरू करने की जानकारी दी है। यह मिशन भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता और वैज्ञानिक उपलब्धियों का एक और उदाहरण है।

जिक्रयोग है कि श्रीहरिकोटा भारत के आंध्र प्रदेश के तिरुपति (और नेल्लोर) जिले में बंगाल की खाड़ी के पास स्थित एक द्वीप है। यह आंध्र प्रदेश के पूर्वी तट पर पुलिकट झील को बंगाल की खाड़ी से अलग करता है।

यहां प्रसिद्ध सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) स्थित है, जहाँ से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा रॉकेट और उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जाता है। इसे भारत का ‘स्पेसपोर्ट’ भी कहा जाता है।

श्रीहरिकोटा से होगा प्रक्षेपण, 28 अगस्त को VAB से Umbilical Tower पहुंचा रॉकेट; रात 2:25 बजे से शुरू होगी लाइव स्ट्रीमिंग

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का अगला महत्वपूर्ण मिशन अब अपने निर्धारित लॉन्च के बेहद करीब पहुंच गया है। GSLV-F17/EOS-05 मिशन का प्रक्षेपण 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे IST पर किया जाना है।

3 सितंबर की शाम करीब 7:47 बजे के हिसाब से लॉन्च में लगभग 7 घंटे 8 मिनट बाकी हैं। ISRO ने मिशन की लाइव स्ट्रीमिंग रात 2:25 बजे IST से शुरू करने की जानकारी दी है।

ISRO के अनुसार GSLV-F17 को 28 अगस्त 2026 को Vehicle Assembly Building (VAB) से Umbilical Tower (UT) तक ले जाया गया था। यह प्रक्रिया श्रीहरिकोटा स्थित Satish Dhawan Space Centre, SHAR (SDSC SHAR) में मिशन की तैयारियों के दौरान की गई।

क्या है GSLV-F17 मिशन?

GSLV-F17 भारत के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV) की 19वीं उड़ान है। इस मिशन में GSLV-F17 रॉकेट EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को लेकर उड़ान भरेगा।

ISRO के मुताबिक EOS-05 एक अत्याधुनिक Earth Observation spacecraft है और भारत का जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग करने वाला पहला उपग्रह है।

मिशन में उपग्रह को सीधे सामान्य Geostationary Orbit में नहीं, बल्कि Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) में स्थापित किया जाना है। ISRO के मिशन ब्रोशर के मुताबिक इस कक्षा की नाममात्र Perigee 170 किलोमीटर और Apogee 28,934 किलोमीटर निर्धारित है। मिशन के लिए पेलोड मास लगभग 2,367 किलोग्राम दिया गया है।

GSLV-F17 की खासियत

मिशन में इस्तेमाल होने वाला GSLV-F17 करीब 51.7 मीटर ऊंचा और इसका Lift-off Mass करीब 420.5 टन है। यह तीन चरणों वाला लॉन्च व्हीकल है। इसमें पहला चरण S139 और चार L40H liquid strap-ons, दूसरा चरण GL40HT और तीसरा चरण CUS15 cryogenic upper stage है। इसके payload fairing का व्यास 4 मीटर है।

ISRO के आधिकारिक विवरण के अनुसार GSLV एक ऐसा लॉन्च व्हीकल है जिसे मुख्य रूप से भारी संचार उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट जैसी कक्षाओं में पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है। GSLV में स्वदेशी Cryogenic Upper Stage का इस्तेमाल किया जाता है।

कहां से होगा लॉन्च?

GSLV-F17/EOS-05 का प्रक्षेपण Satish Dhawan Space Centre, SHAR, Sriharikota के Second Launch Pad (SLP) से निर्धारित है। ISRO ने अपनी आधिकारिक मिशन जानकारी में यही लॉन्च साइट दी है।

पाठकों के लिए जरूरी जानकारी

🚀 मिशन: GSLV-F17/EOS-05

🛰️ उपग्रह: EOS-05

📅 लॉन्च: 4 सितंबर 2026

⏰ निर्धारित समय: सुबह 2:55 बजे IST

📺 लाइव स्ट्रीमिंग: रात 2:25 बजे IST से

📍 लॉन्च साइट: Second Launch Pad, Satish Dhawan Space Centre, SHAR, Sriharikota

🎯 निर्धारित कक्षा: Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO)

🚀 GSLV-F17: GSLV की 19वीं उड़ान

🛰️ EOS-05: Earth Observation spacecraft

कितने घंटे बाकी?

3 सितंबर 2026 को शाम करीब 7:47 बजे IST से गणना करें तो 4 सितंबर सुबह 2:55 बजे के निर्धारित लॉन्च तक लगभग 7 घंटे 8 मिनट बाकी हैं।

ISRO के आधिकारिक मिशन पेज पर फिलहाल GSLV-F17/EOS-05 को 4 सितंबर 2026 के लिए Scheduled Mission के रूप में प्रदर्शित किया गया है।