जिम उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री में जीएसटी चोरी कर माल तैयार करने का शक, कई वर्करों की ईएसआई भी नहीं काटी जा रही, नगर निगम और हेल्थ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
जालंधर (हरीश शर्मा, रोजाना भास्कर) : जिम का सामान बनाने वाली फर्म प्राइड्स स्ट्रेंथ को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। हाईवे के साथ लगती जगह पर कब्जा कर वहां कारोबार किया जा रहा है और पीछे एक इमारत का निर्माण भी कराया जा रहा है, जोकि नक्शे के मुताबिक बिलकुल अवैध तरीके से बनाई जा रही है। मामले में रिकॉर्ड और मौके की जांच होती है तो इमारत का ध्वस्त किया जाना तय है। जिम के उपकरण बनाने के कारोबार को सोमनाथ पांडे नाम के व्यक्ति ने शुरू किया था और अब उनका बेटा इस कारोबार को धड़ल्ले से आगे बढ़ा रहा है। पिता-पुत्र की जोड़ी लगातार सरकारी रेवेन्यू चोरी कर रहे हैं।
सबसे गंभीर मुद्दा इसी फर्म की फैक्ट्री में जीएसटी चोरी से जुड़ा है। बिना सही बिलिंग अथवा वास्तविक कारोबार को कम दिखाकर जिम उपकरण तैयार किए जा रहे हैं। जीएसटी कानून में टैक्स चोरी, टर्नओवर छिपाने, गलत रिकॉर्ड रखने अथवा फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर टैक्स, ब्याज और जुर्माने की कार्रवाई का प्रावधान है। गंभीर मामलों में धारा 132 के तहत आपराधिक कार्रवाई और परिस्थितियों के अनुसार सजा का भी प्रावधान है।
वर्करों के ईएसआई को लेकर भी सवाल
फैक्ट्री में काम करने वाले कई वर्करों का ईएसआई नहीं काटा जा रहा। मौजूदा व्यवस्था में सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान लागू हैं और ईएसआई के तहत कवर होने वाले प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों का पंजीकरण तथा निर्धारित योगदान जरूरी है। ईएसआई के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार वर्तमान योगदान दर नियोक्ता के लिए 3.25 प्रतिशत और कर्मचारी के लिए 0.75 प्रतिशत है। जबकि पांडे की फर्म में नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। मालिक आसपास की फैक्ट्रियों के मालिकों को भी सरकारी अफसरों की धमकियां देते रहते हैं।
देश में नए श्रम कानून 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुके हैं। Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 में कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और रिकॉर्ड संबंधी दायित्व शामिल हैं।
हाईवे की जगह और निर्माण पर नगर निगम की जिम्मेदारी
यदि किसी सरकारी अथवा सार्वजनिक उपयोग वाली जमीन पर कब्जा कर निर्माण किया गया है तो संबंधित स्थानीय निकाय को रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच करनी चाहिए। पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग के तहत बिल्डिंग परमिट, प्लान अप्रूवल, डेवलपमेंट परमिट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। पंजाब म्यूनिसिपल कानून में भी बिना मंजूरी भवन खड़ा करने पर रोक का प्रावधान है।
इसलिए प्राइड्स स्ट्रेंथ के पीछे चल रहे निर्माण को लेकर यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि जमीन का मालिकाना हक किसके नाम है, निर्माण के लिए नक्शा पास है या नहीं, निर्माण की अनुमति ली गई है या नहीं और यदि हाईवे/सरकारी जमीन का इस्तेमाल हुआ है तो उसकी अनुमति किस विभाग से ली गई।
अधिकारियों पर मिलीभगत साबित हुई तो विजिलेंस की भूमिका
सबसे बड़ा सवाल उन सरकारी अधिकारियों की भूमिका को लेकर उठता है, जिनके अधिकार क्षेत्र में फैक्ट्री, श्रमिकों, स्वास्थ्य सुरक्षा, निर्माण और टैक्स संबंधी नियम आते हैं। केवल किसी अधिकारी द्वारा कार्रवाई न करना अपने आप में भ्रष्टाचार साबित नहीं करता। लेकिन यदि जांच में रिश्वत, अवैध लाभ, जानबूझकर नियमों की अनदेखी अथवा किसी निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग सामने आता है तो मामला भ्रष्टाचार कानून के दायरे में आ सकता है।
पंजाब सरकार के बिजनेस रूल्स में विजिलेंस विभाग के दायरे में सरकारी कर्मचारियों से जुड़े रिश्वत, भ्रष्टाचार, सरकारी फंड के दुरुपयोग, सरकार को हुए नुकसान तथा अन्य अनियमितताओं से संबंधित मामले शामिल हैं।
Prevention of Corruption Act में रिश्वत लेने वाले लोक सेवक के अलावा भ्रष्टाचार में उकसाने/सहायता करने से जुड़े प्रावधान भी हैं। धारा 7 के तहत लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ लेना अपराध है और धारा 12 भ्रष्टाचार संबंधी अपराधों के abetment को दंडनीय बनाती है।
पता चला है कि जल्द ही नगर निगम, लेबर विभाग, हेल्थ विभाग और संबंधित अन्य एजेंसियां प्राइड्स स्ट्रेंथ के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की मौके पर जांच शुरू करेंगे। अगर मामला नियमों को ताक पर रखने का निकला तो मालिक सोमनाथ पांडे और उनके अन्य पारिवारिक सदस्यों पर कार्रवाई तय है।














