बिना हेलमेट घर से निकलना पड़ सकता है भारी, जालंधर की सड़कों पर घूम रहा है “यम”

जालंधर रोज़ाना भास्कर (हरीश शर्मा): जालंधर में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए फोर्टिस अस्पताल जालंधर की ओर से एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली ज्यादातर मौतें सिर में गंभीर चोट लगने के कारण होती हैं, जिन्हें हेलमेट पहनकर काफी हद तक रोका जा सकता है। ऐसे में बिना हेलमेट घर से बाहर निकलना अब जान जोखिम में डालने जैसा साबित हो सकता है।

विश्व इमरजेंसी मेडिसिन डे 2026 के अवसर पर फोर्टिस अस्पताल जालंधर ने जालंधर ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से इमरजेंसी रिस्पॉन्स और ट्रॉमा मैनेजमेंट वर्कशॉप आयोजित की।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान प्राथमिक सहायता क्षमताओं को मजबूत करना था। ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को बेसिक लाइफ सपोर्ट, ट्रॉमा केयर और तत्काल जीवनरक्षक उपायों की जानकारी दी गई।

इस दौरान सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत दोपहिया वाहन चालकों को मुफ्त हेलमेट भी वितरित किए गए। फोर्टिस अस्पताल के विशेषज्ञों ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हेलमेट केवल चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि जिंदगी बचाने के लिए जरूरी है।

फोर्टिस अस्पताल जालंधर के हेड इमरजेंसी सर्विसेज डॉ. मनदीप सिंह ने कहा कि किसी भी हादसे में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर सही समय पर प्राथमिक सहायता मिल जाए तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

जालंधर ट्रैफिक पुलिस के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर एस. नवजोत सिंह और एसीपी संदीप कुमार ने कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिस अक्सर सबसे पहले दुर्घटना स्थल पर पहुंचती है, इसलिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद लाभदायक साबित होते हैं।

फोर्टिस अस्पताल जालंधर के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. अंकुश मेहता ने कहा कि अस्पताल लगातार सड़क सुरक्षा और इमरजेंसी जागरूकता को लेकर समाज में अभियान चला रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हमेशा हेलमेट पहनकर ही घर से निकलें।