महाशिवरात्रि : नीलकंठ की भक्ति में डूबा पूरा हिंदोस्तां

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कुम्भनगर. दिव्य और भव्य कुम्भ के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर सोमवार को पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के संगम में अब तक करीब 25 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। महाशिवरात्रि स्नान पर्व का मुहूर्त रात्रि एक बजकर 26 मिनट पर लग गया था। संगम तट पर हल्की बूंदा-बांदी और सर्द हवाओं की परवाह किये बगैर श्रद्धालुओं ने “हर-हर गंगे और हर-हर महादेव” का स्मरण करते मध्य रात्रि के बाद से ही आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी।

महाशिरात्रि स्नान कुम्भ का 49 वां दिन है। रविवार शाम से ही श्रद्धालुओं का सैलाब मेला क्षेत्र में उमड़ने लगा। अरैल क्षेत्र में बने टेंट सिटी के शिविर, शहर के सभी होटल, श्रद्धालुओं से भरे थे। विदाई की बेला में भी कुम्भ की आभा बरकरार है। संगम का विहंगम दृश्य अभी भी पहले जैसा ही बना हुआ है।

श्रद्धालुओं में गंगा स्नान के अलावा और कोई तमन्ना नहीं दिखाई दी। आठ से 10 किलोमीटर पैदल चलकर संगम पहुचने वाले श्रद्धालुओं को जहां जगह मिली स्नान के बाद न/न खाने की चिंता न और किसी सुविधा की आशा बस रेती पर थकावट दूर करने गमछा बिछाकर लेट गए। पारंपरिक देसी भीड़ में आधुनिकता और परंपरा दोनों का संगम दिखाई दिया। युवा जहां जींस में टैबलेट लेकर गंगा स्नान करने को आए तो बुजुर्ग एक धोती सहेजे और लाठी टेंकते ही संगम के किनारे पहुंचे। इस भीड़ में भारतीय संस्कार भी रचे बसे दिखाई दिए।

त्रिवेणी के विस्तीर्ण रेती पर एक बार फिर श्रद्धालुओं के आस्था के समंदर को संगम अपनी बाहों में भरने को आतुर दिखा। कुम्भ मेले के अखिरी स्नान का पुण्य हासिल करने के लिए संगम नोज से लेकर अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। तट पर स्नान के बाद पूजा और आराधना में श्रद्धालु लीन हैं। कोई संगम में दूध चढ़ा रहा है तो कोई स्नान कर तट पर दीपदान कर रहा है। संगम तट पर कुछ जगह श्रद्धालु मनौती कर दोने में पुष्पों के बीच दीपक रखकर श्रद्धालु गंगा में प्रवाहित कर दोनों हाथ जोड़कर परिवार की सुख और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। तीर्थ पुराेहित इस भीड़ में यजमानों को सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल कामना के लिए संकल्प कराते नजर आए।

उज्जैन में उमड़ा जनसैलाब, शिवालयों में लंबी कतारें
भोपालः समूचे देश की भांति मध्यप्रदेश में भी आज महाशिवरात्रि के पर्व पर तड़के से ही औघड़दानी महादेव की पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न शिवालयों में पर्व का उल्लास दिखाई दे रहा है। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर, खंडवा के ओंकारेश्वर महादेव और मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर के साथ अन्य सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

विदिशा जिले के उदयपुर स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में आज हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नीलकंठेश्वर महादेव का करीब आठ फीट ऊंचा शिवलिंग वर्ष भर पीतल के कवच से ढका रहता है, जो केवल महाशिवरात्रि के अवसर पर अभिषेक हेतु ही 24 घंटे के लिए हटाया जाता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर में महाशिवरात्रि पर्व के मौके कल देर रात से ही मंदिर के कपाट खुले रहने के चलते हजारों श्रद्धालुओं के दर्शनों का सिलसिला लगातार जारी है।

खंडवा जिले स्थित देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक ओंकारेश्वर महादेव मंदिर में भी आज नर्मदा के तट समेत मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इस मंदिर में भी तड़के से ही दर्शनार्थियों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था। प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। छतरपुर के विश्वप्रसिद्ध खजुराहो के कंदरिया महादेव मंदिर में भी महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। 

रायसेन जिले स्थित ऐतिहासिक भोजपुर मंदिर में आज मेले के तौर पर महाशिवरात्रि पर्व पूरी धूमधाम से मनाया जा रहा है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर के लिए विशेष सजावट की गई है। आज सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं का यहां जुटना शुरु हो गया था। प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत अन्य शहरों से भी महाशिवरात्रि की धूम और पूरी श्रद्धा-भक्ति से उत्सव मनाए जाने की खबरें हैं।