एलडिको ग्रीन की हरियाली की ‘सपना’: बैंक अधिकारी से पर्यावरण योद्धा तक का प्रेरणादायक सफर

पेशे से बैंक अधिकारी, दिल प्रकृति के लिए धड़कता है; अपनी जेब से खर्च कर हजारों पौधे लगवाए, स्वतंत्रता दिवस पर मंत्री मोहिंदर भगत ने किया सम्मानित

जालंधर (रोजाना भास्कर हरीश शर्मा) : किसी कॉलोनी की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और आलीशान घरों से नहीं होती। असली पहचान तब बनती है, जब सुबह की हवा पेड़ों की पत्तियों से टकराकर खुशबू बिखेरे, सड़कों के किनारे हरियाली नजर आए और वहां रहने वाले लोग आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ खूबसूरत छोड़ने का संकल्प लें। जालंधर के एलडिको ग्रीन में आज हरियाली की जो तस्वीर दिखाई देती है, उसके पीछे एक महिला का ऐसा जुनून है, जिसने पौधारोपण को शौक से मिशन और मिशन को आंदोलन बना दिया। यह कहानी है बैंक अधिकारी सपना तुली की, जिनका नाम अब एलडिको ग्रीन की हरियाली के साथ जुड़ चुका है।

पेशे से बैंक अधिकारी सपना तुली ने कभी नहीं सोचा था कि पौधों के साथ शुरू हुआ उनका सफर एक दिन उन्हें पर्यावरण योद्धा की पहचान दिलाएगा। शुरुआत बेहद साधारण थी। सुबह करीब छह बजे बच्चों को स्कूल भेजने के बाद वह अपनी स्कूटी उठातीं और निकल पड़तीं। न कोई बड़ा काफिला, न कैमरों की चमक, न किसी सम्मान की उम्मीद और न प्रचार की कोई चाहत। कभी पौधे खरीदने, कभी उन्हें लगाने की जगह तलाशने और कभी पहले लगाए पौधों की हालत देखने के लिए वह अकेले ही एलडिको ग्रीन की गलियों और आसपास के इलाकों में घूमती रहीं। जो काम किसी के लिए कभी-कभार की गतिविधि हो सकता है, सपना तुली के लिए वह रोजमर्रा की जिम्मेदारी बन गया।

प्रकृति से शुरू हुआ यह प्यार धीरे-धीरे जुनून में बदला और फिर इस जुनून ने एलडिको ग्रीन की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी। उन्होंने सिर्फ पौधे लगाए नहीं, बल्कि उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह संभालने की कोशिश की। अपनी जेब से पैसा खर्च किया, पौधे खरीदे, उन्हें सही स्थान तक पहुंचाया, रोपण करवाया और उनके संरक्षण की चिंता की। उनके लिए पौधारोपण फोटो खिंचवाने या एक दिन का कार्यक्रम पूरा करने का नाम नहीं था। उनका सीधा मानना रहा कि पौधा लगाना आसान है, लेकिन उसे पेड़ बनाना असली पर्यावरण सेवा है।

यही वजह है कि सपना तुली की कहानी पौधों की संख्या से कहीं बड़ी है। उन्होंने एलडिको ग्रीन में एक ऐसी सोच पैदा की कि खाली जमीन को सिर्फ खाली जगह न समझा जाए, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली में बदला जाए। उनका सपना था कि एलडिको ग्रीन सिर्फ एक रिहायशी कॉलोनी के रूप में नहीं, बल्कि अपनी हरियाली, स्वच्छ वातावरण और पर्यावरणीय चेतना के लिए भी पहचानी जाए। धीरे-धीरे उनकी इस सोच से लोग जुड़ते गए और एक महिला की निजी पहल सामूहिक अभियान में बदलती चली गई।

इस बदलाव में एलडिको ग्रीन के प्रधान नरेश सरना की प्रेरणा और सहयोग का भी विशेष महत्व रहा। उन्होंने हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के इस प्रयास को प्रोत्साहित किया। वहीं जमीनी स्तर पर पौधारोपण के काम में लगातार सक्रिय रहने वाले सुखविंदर सिंह सुक्खी रूपरा ने इस अभियान को जमीन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पर्यावरण के प्रति जागरूक और विषय के जानकार एडवोकेट जेपी सिंह ने भी सपना तुली को प्रेरणा और मार्गदर्शन दिया। सपना तुली इस पूरे सफर में अनूप मिगलानी, संजय गुलाटी, सर्बजीत मोहन लूथरा, नरेश ढल्ल, संजीव लखनपाल, डेजी भल्ला, डॉ. नवदीप अनेजा, सौरव शर्मा, गोपाल कृष्ण, एडवोकेट राजेश वर्मा, पुरी साहब, ममता मिगलानी, नवतेज सिंह, प्रो. कुणाल, सोनिया कुणाल वर्मा, राकेश शर्मा, वरिंदर कांसल, नेक्टर चौहान, निशी गुलाटी, रोज लूथरा, श्वेता गोपाल, महक जिंदल, दीपिका अग्रवाल, कंचन और चारू ढल्ल सहित उन तमाम लोगों का दिल से आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने किसी न किसी रूप में उनका हौसला बढ़ाया, साथ दिया और हरियाली की इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

दरअसल, सपना तुली की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उन्होंने लोगों को सिर्फ पौधे लगाने के लिए नहीं कहा, बल्कि पौधों से भावनात्मक रिश्ता जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि जिस तरह हम अपने घर की दीवार, दरवाजे और बगीचे की देखभाल करते हैं, उसी तरह हमारे आसपास लगा एक छोटा पौधा भी हमारी जिम्मेदारी है। पानी की जरूरत हो, सुरक्षा की जरूरत हो या सफाई की—पौधे को बचाना भी पौधारोपण का ही हिस्सा है। यही सोच उनके अभियान को सामान्य पौधारोपण कार्यक्रमों से अलग करती है।

सपना तुली की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि वह पूर्णकालिक पर्यावरण कार्यकर्ता नहीं हैं। बैंक की नौकरी, परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच प्रकृति के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। लेकिन उन्होंने साबित किया कि समाज के लिए कुछ करने के लिए किसी बड़े पद, संस्था या सरकारी जिम्मेदारी की जरूरत नहीं होती। अगर मन में संवेदना और इरादे में मजबूती हो तो रोजमर्रा की जिंदगी में से भी समाज और प्रकृति के लिए समय निकाला जा सकता है।

और फिर आया वह दिन, जिसने इस पूरे सफर को एक नई पहचान दे दी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार की ओर से मंत्री मोहिंदर भगत ने सपना तुली को उनके सराहनीय पर्यावरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया। सम्मान मिलने के साथ ही सपना तुली की वर्षों की मेहनत को सार्वजनिक पहचान मिली। यह सिर्फ एक महिला का सम्मान नहीं था, बल्कि एलडिको ग्रीन की उस सोच का भी सम्मान था, जिसने पौधारोपण को एक अभियान से आगे बढ़ाकर सामूहिक संकल्प का रूप दिया।

जिस महिला ने कभी सुबह छह बजे अकेले स्कूटी पर निकलकर हरियाली की तलाश शुरू की थी, आज उसी के प्रयासों की चर्चा सम्मान के मंच तक पहुंच चुकी है। यही किसी भी अच्छे काम की सबसे खूबसूरत जीत होती है—जब शुरुआत करने वाला व्यक्ति अकेला हो और कुछ समय बाद वही काम दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाए।

सपना तुली के नाम में भी जैसे उनकी कहानी छिपी है। उन्होंने एक सपना देखा—एलडिको ग्रीन को और हरा-भरा बनाने का। उस सपने को संकल्प बनाया, संकल्प को जुनून बनाया और जुनून को ऐसी मुहिम में बदल दिया, जिसमें आज अनेक लोग अपने-अपने स्तर पर योगदान दे रहे हैं। अब यह सपना सिर्फ सपना तुली का नहीं रहा, यह एलडिको ग्रीन के उन तमाम लोगों का सपना है, जो चाहते हैं कि उनकी कॉलोनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उतनी ही खूबसूरत और हरी-भरी रहे।

आज सपना तुली को मिला सम्मान निश्चित रूप से गर्व का विषय है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान शायद वह दिन होगा जब आज लगाए गए पौधे बड़े होकर पेड़ बनेंगे। जब उन्हीं पेड़ों की छांव में बच्चे खेलेंगे, बुजुर्ग बैठेंगे, पक्षी घोंसले बनाएंगे और आने वाली पीढ़ी महसूस करेगी कि उनसे पहले रहने वाले लोगों ने उनके लिए सिर्फ मकान और सड़कें नहीं, बल्कि सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा और जीने के लिए हरियाली भी छोड़ी थी।

सपना तुली की कहानी यह साबित करती है कि बदलाव हमेशा बड़े भाषणों और बड़ी घोषणाओं से नहीं आता। कभी-कभी बदलाव एक छोटी-सी स्कूटी पर रखे कुछ पौधों से शुरू होता है। एक महिला सुबह छह बजे निकलती है, अपने पैसे से पौधा खरीदती है, उसे जमीन में लगाती है और फिर उसकी देखभाल में जुट जाती है। देखते ही देखते वही छोटा कदम लोगों को जोड़ता है, सोच बदलता है और पूरी कॉलोनी की तस्वीर बदलने लगता है।

आज सपना तुली को मिला सम्मान उनके नाम के आगे एक उपलब्धि जरूर जोड़ता है, लेकिन असली उपलब्धि यह है कि उन्होंने एलडिको ग्रीन में हरियाली को एक विषय नहीं, एक भावना बना दिया है।

उनकी इस यात्रा को सलाम है। उन सभी साथियों को सलाम है जिन्होंने उनका हौसला बढ़ाया। और उस सोच को सलाम है, जो कहती है

“एक पौधा लगाना सिर्फ धरती में एक पौधा लगाना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए जिंदगी की एक नई उम्मीद रोपना है।”
सपना तुली ने यह उम्मीद रोपी है। अब एलडिको ग्रीन का हर निवासी इस उम्मीद को पेड़ बनाने में अपना योगदान दे सकता है।