जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो। साई दास स्कूल ग्राउंड, पटेल चौक में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धेय आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य, सत्संग, सेवा और सुमिरन का महत्व समझाया।

“सच्ची प्रार्थना बिना विलंब सीधे परमात्मा तक पहुँचती है”
आचार्य श्री ने कहा कि संसार की किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए भले ही डाकिये की आवश्यकता पड़ती हो, लेकिन हृदय से निकली सच्ची प्रार्थना बिना किसी विलंब के सीधे परमात्मा तक पहुँच जाती है। जो लोग भगवान की शरण में आ जाते हैं, वे किसी से नहीं डरते, क्योंकि उनके लिए स्वर्ग, मोक्ष और नरक में भी भगवान के ही दर्शन होते हैं।

श्री बाँके बिहारी जी के प्राकट्य दिवस की सुनाई महिमा
महाराज जी ने श्री बाँके बिहारी जी के प्राकट्य दिवस की मंगल एवं हार्दिक बधाई देते हुए विहार पंचमी की महिमा सुनाई। उन्होंने बताया कि मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी के दिन स्वामी जी ने जैसे ही तान छेड़ी, वैसे ही श्यामा-श्याम प्रकट हो गए। स्वामी जी की प्रार्थना पर श्री राधा जी अपने प्रियतम कुंजविहारी में इस प्रकार समाहित हो गईं, जैसे बादल में बिजली समा जाती है। इसी प्रकार युगल सरकार की सम्मिलित छवि बाँके बिहारी जी के रूप में शोभायमान हुई और अगहन सुदी पंचमी विहार पंचमी के नाम से प्रसिद्ध हुई।

कपिल–देवहूति संवाद और ध्रुव चरित्र ने मोहा मन
आचार्य श्री ने कहा कि जिस प्रकार विशाल सरोवर से असंख्य नाले निकलते हैं, उसी प्रकार सत्त्वनिधि भगवान श्रीहरि के अनगिनत दिव्य अवतार प्रकट हुए हैं। समस्त ऋषि, मनु, देवता, प्रजापति और महान शक्तियाँ भगवान के ही अंश स्वरूप हैं।

कथा के दौरान कपिल–देवहूति संवाद का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि कर्दम ऋषि के वन गमन के पश्चात माता देवहूति मोक्षमार्ग की प्राप्ति के लिए भगवान कपिल के पास पहुँचीं। भगवान कपिल ने उन्हें दिव्य ज्ञान प्रदान किया, जिसके माध्यम से वे संसार के बंधनों से मुक्त हुईं और ‘सिद्धिरा’ नदी के रूप में परिणत हुईं।

इसके बाद सती चरित्र का मनोमुग्धकारी वर्णन किया गया, जिससे पूरा कथा परिसर शिवमय हो उठा। वहीं परम भक्त ध्रुव जी की कथा सुनाते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मात्र पाँच वर्ष की अल्प आयु में ध्रुव जी को भगवान के साक्षात दर्शन हुए और उन्हें अखण्ड राज्य के साथ दिव्य ध्रुव लोक की प्राप्ति हुई।

सत्संग, सेवा और सुमिरन से जीवन होता है श्रेष्ठ
आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि प्रभु की कृपा प्राप्त करने के लिए मनुष्य को स्वयं को योग्य बनाना आवश्यक है। कुसंग से दूर रहना, सत्संग करना, सेवा-सुमिरन में मन लगाना और एकांत में भी सद्कर्मों पर अडिग रहना ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है।

गणमान्य लोगों ने की कथा में शिरकत
तृतीय दिवस की कथा में उद्योगपति शीतल विज, पूर्व विधायक राजिंदर बेरी, पूर्व विधायक केडी भंडारी, हरीश सचदेवा और अजय चड्ढा ने मुख्य मेहमान के रूप में शिरकत की।

इस अवसर पर यशपाल चौधरी, अभिषेक चौधरी, सुनील नय्यर, उमेश औहरी, संदीप मलिक, चंदन वडेरा, ब्रिज मोहन चड्ढा, महेश मखीज, अंकुश जुनेजा, अश्वनी कुमार (आशू), संजय सहगल, हेमंत थापर, राजवंश मल्होत्रा, देवेंद्र अरोड़ा, रिंकू मल्होत्रा, बलविंदर शर्मा, विजय शर्मा, सोनू चोपड़ा, सुमित गोयल, पंडित श्री कपिल देव शर्मा, संदीप कुमार, भूपेंद्र सिंह (बिल्ला), तरुण सरीन, जितेंद्र सोनू, राजेश बीगामल, तरसेम रिंकू, अरुण मल्होत्रा, राहुल शर्मा और राहुल बाहरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

तृतीय दिवस की कथा ने श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य और सच्ची प्रार्थना की महिमा से सराबोर कर दिया। कथा के दिव्य प्रसंगों का श्रवण करने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं।














