जालंधर में शराब माफिया का जाल! एक महीने में 38 केस, हजारों लीटर अवैध शराब जब्त

एक्साइज विभाग की कार्रवाई के बावजूद बड़े तस्कर पहुंच से दूर; सरकारी राजस्व के साथ लोगों की सेहत पर भी खतरा

जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो। शहर और आसपास के इलाकों में अवैध शराब का कारोबार प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक्साइज विभाग ने 20 जून से 31 जुलाई तक करीब 38 मामलों में कार्रवाई करते हुए अवैध शराब और लाहन बरामद की तथा कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। कुछ मामलों में अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल वाहन भी जब्त किए गए। इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने वाले बड़े चेहरे आखिर कब कानून की गिरफ्त में आएंगे।

—सरकार और ठेकेदारों को लाखों के राजस्व का नुकसान

अवैध शराब का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सरकार के राजस्व से भी जुड़ा है। बिना लाइसेंस और नियमों के शराब बेचने वाले तस्कर सरकारी शुल्क और टैक्स से बचकर कारोबार करते हैं। इससे सरकार के साथ-साथ अधिकृत शराब ठेकेदारों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार, शहर के विभिन्न इलाकों में अवैध शराब की बिक्री को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। विभाग की ओर से सूचना मिलने पर छापेमारी भी की जाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के बावजूद नेटवर्क के पीछे मौजूद बड़े लोगों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।

—-दरिया किनारे तैयार हो रही अवैध देसी शराब पर सवाल

अवैध देसी शराब तैयार करने के लिए दरिया और सुनसान इलाकों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसी शराब में मिलावट या जहरीले पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मानकों के तैयार की गई शराब में इस्तेमाल होने वाले रसायन और मिलावटी पदार्थ जानलेवा साबित हो सकते हैं। ऐसे में केवल शराब पकड़ना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि इसके निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है।

—–38 केसों के बाद भी बड़ा सवाल—कौन चला रहा नेटवर्क?

20 जून से 31 जुलाई के बीच करीब 38 मामलों में कार्रवाई यह संकेत देती है कि अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सवाल यह है कि पकड़े गए छोटे तस्करों के पीछे कौन लोग हैं और उन्हें शराब की सप्लाई कहां से मिल रही है।

कई बार कार्रवाई के दौरान छोटे आरोपी पकड़े जाते हैं, जबकि नेटवर्क को संचालित करने वाले कथित बड़े तस्कर जांच की पहुंच से बाहर रह जाते हैं। यदि ऐसा होता रहा तो कार्रवाई के बावजूद अवैध शराब का कारोबार जारी रहने और तस्करों के हौसले बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

लोगों की सेहत से खिलवाड़ रोकना जरूरी!

स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध और मिलावटी शराब बेचने वालों के खिलाफ कड़ी और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि बाजार में बिना मानकों के तैयार की गई शराब पहुंच रही है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने के साथ सप्लाई चेन को भी तोड़ा जाना चाहिए। शराब माफिया पर प्रभावी कार्रवाई के लिए एक्साइज विभाग और पुलिस को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर निर्माताओं, सप्लायरों, तस्करों और कथित नेटवर्क संचालकों तक पहुंचना होगा।

अब सिर्फ छापेमारी नहीं, पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत

एक्साइज विभाग की लगातार कार्रवाई के बावजूद यदि अवैध शराब का कारोबार कायम है, तो यह जांच का विषय है कि पकड़े गए मामलों के बाद आगे की सप्लाई कैसे जारी रहती है। लोगों की मांग है कि सिर्फ छोटी बरामदगी और गिरफ्तारियों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।