जालंधर/नई दिल्ली, रोजाना भास्कर ब्यूरो। पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने सोमवार, 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद परगट सिंह ने इसे अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि पंजाब और पंजाबियों के हित को लेकर राहुल गांधी के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और संकल्प के लिए वह उनके आभारी हैं।

परगट सिंह ने कहा कि नई ऊर्जा और कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं व पंजाब की जनता की सामूहिक शक्ति के साथ पार्टी संगठन को मजबूत करने और पंजाब का बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी मेहनत की जाएगी।

AAP ने कसा था तंज, “राहुल गांधी समय नहीं दे रहे”
परगट सिंह की राहुल गांधी से मुलाकात से पहले AAP पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने तंज कसते हुए कहा था कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के चार दिन बाद भी परगट सिंह पंजाब नहीं पहुंचे हैं और उन्हें राहुल गांधी से मिलने का समय तक नहीं मिल रहा।

अरोड़ा ने कांग्रेस हाईकमान पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में निराशा है और पार्टी नेतृत्व ने उनकी भावनाओं का ध्यान नहीं रखा।
परगट का पलटवार- “थोड़ा इंतजार करो”
अमन अरोड़ा के बयान पर परगट सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि AAP के पास उनके खिलाफ बोलने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, “फिक्र न करें, मुझे अच्छी तरह खेलना आता है। आम आदमी पार्टी की किश्ती डूबने वाली है। अरोड़ा को थोड़ा इंतजार करना चाहिए।”
परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के कांग्रेस को लेकर दिए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि CM को बयानबाजी के बजाय अपने शासनकाल का हिसाब जनता को देना चाहिए।
6 अक्टूबर को पंजाब लौटेंगे, गुटबाजी खत्म करने पर फोकस
परगट सिंह 6 अक्टूबर को दिल्ली से पंजाब लौटेंगे। इसके बाद चंडीगढ़ में कांग्रेस की वरिष्ठ लीडरशिप के साथ मुलाकातों का दौर शुरू होगा। माना जा रहा है कि इन बैठकों में पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी खत्म करने, नेताओं को एकजुट करने और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर रणनीति पर चर्चा होगी।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद परगट सिंह ने दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में माथा टेका और इसके बाद केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, अंबिका सोनी समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर से भी मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया।


परगट सिंह की इन मुलाकातों को पंजाब कांग्रेस में सभी गुटों को साथ लेकर चलने और हाईकमान के साथ सीधा तालमेल मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब पंजाब लौटने के बाद उनकी अगली राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।














