बैडमिंटन खिलाड़ियों को कोचिंग देंगे ओलंपियन दीपांकर भट्टाचार्य जालंधर के रायजादा हंसराज स्टेडियम में चलाएंगे अकादमी

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खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के साथ नई तकनीकों से करवाएंगे अवगत

जालंधर रोजाना भास्कर.(हरीश शर्मा) शहर के बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए बहुत खुशी की बात हैं कि अब उन्हें बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय एकल खिलाड़ी एवं ओलंपियन दीपांकर भट्टाचार्य से कोचिंग मिलेगी। शनिवार को जालंधर आये दीपांकर भट्टाचार्य ने रायजादा हंसराज स्टेडियम में अकादमी की शुरूआत की। इस दौरान बैडमिंटन प्लेयर्स के अलावा उनके पेरेंट्स भी उपस्थित रहे। जानकारी अनुसार यह अकादमी रायजादा हंसराज स्टेडियम में डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन के सहयोग से चलाई जाएगी। दीपांकर भट्टाचार्य ने बताया कि इस अकादमी में दो कोच असम से इम्तियाज और कोलकता से सौरव जोशी प्लेयर्स को कोचिंग देंगे। दोनों ही बैडमिंटन खेल के माहिर कोच हैं, जोकि अब यहां पर खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के साथ उनको खेल की नई तकनीकों से अवगत करवाएंगे। भट्टाचार्य ने कहा कि उभरते और नये खिलाड़ियों को सिखाना अच्छा लगता हैं। इसलिए अब वह जालंधर में खिलाड़ियों को कोचिंग देंगे। उन्होंने कहा कि वह हर माह के अंतिम सप्ताह में जालंधर आएंगे और खिलाड़ियों की महीने भर की परफॉर्मेंस को चैक करेंगे। उन्होंने खिलाड़ियों को परिश्रम करने व देश का नाम ऊंचा करने को प्रेरित किया। भट्टाचार्य ने बैडमिंटन खिलाड़ियों के साथ खास बातचीत भी की और पेरेंट्स द्वारा पूछे गये सवालों के जवाब भी दिये। उन्होंने इंडोर स्टेडियम का दौरा करते हुए खिलाड़ियों से अनुभव भी सांझे किए व खेल के नए टिप्स दिए। स्टेडियम में उनके आने से खिलाड़ियों में काफी उत्साह देखने को मिला। बतां दें ओलंपियन दीपांकर भट्टाचार्य मुंबई में भी बैडमिंटन अकादमी चला रहे हैं।

इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ी श्री रितिन खन्ना, डिप्टी कमिश्नर वरिंदर कुमार शर्मा, एडीसी जतिंदर जोरेवाल, पंजाब स्पोर्ट्स विभाग के डिप्टी डायरैक्टर करतार सिंह, जिला खेल अफसर बलविंदर सिंह, बैडमिंटन कोच हरजिंदर सिंह वड़ैच आदि मौजूद थे।

जानें कौन हैं दीपांकर भट्टाचार्यः-

  • देश के पहले शटलर जिन्होंने दो ओलंपिक (बार्सीलोना 1992 और अटलांटा 1996) में देश का प्रतिनिधित्व किया था।
  • कॉमनवेल्थ गेम सहित तीन एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप, तीन थॉमस कप और 5 आल डंग्लैंड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।
  • सार्क बैडमिंटन चैंपियनशिप में टीम चैंपियन और मेन्स सिंगल में रनर-अप रहे।
  • 1992 और 1997 में सीनियर नैशनल रनरअप रहे।
  • लगातार तीन सालों 1994, 1995 और 1996 में सीनियर नैशनल बैडमिंटन चैंपियन बने।
  • 1992 और 1997 में सीनियर नैशनल रनर-अप रहे।
  • 1991 से 1996 तक लगातार इंडिया के नंबर 1 खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।
  • चेक रिपब्लिक के प्राग शहर में 1996 में खेले गए थॉमस कप में इंडियन टीम की कप्तानी की।
  • 2015 में द्रोणाचार्य अवार्ड कमेटी के चेयरमैन रहे।
  • चार बार अर्जुन अवार्ड के लिए नामित।
  • 1987 में अंडर-19 नैशनल चैंपियन बने।
  • 1983 में अंडर-15 वर्ग में सिंगल और डबल्स दोनों प्रतिस्पर्ल्धा में नैशनल चैंपियन का खिताब जीता।