जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के पुराने घोटाले की कड़ियां सीबीआई की छापेमारी के बाद फिर चर्चा में, रिश्तों और संपर्कों की जांच पर उठे सवाल!

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जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो (हरीश शर्मा): पंजाब में कथित भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की मंगलवार को हुई बड़ी कार्रवाई के बाद जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से जुड़े पुराने करोड़ों रुपये के घोटाले की कड़ियां भी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। सीबीआई ने मुख्यमंत्री के विशेष ड्यूटी अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन समेत 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर समेत 8 ठिकानों पर तलाशी ली। सीबीआई के मुताबिक मामले में अधिकारियों की नियुक्तियों, विभागीय कार्रवाई, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, निविदाओं, लाइसेंस, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में कथित आर्थिक लेन-देन की जांच की जा रही है। तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू जालंधर से जुड़ता है। सीबीआई की आज की कार्रवाई में जालंधर में भी आरोपियों से जुड़े परिसर की तलाशी ली गई है। ऐसे में जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में सामने आ चुके पुराने मामलों और उन मामलों से जुड़े लोगों के संपर्कों की पड़ताल का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

हालांकि, अभी तक सीबीआई ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट का पुराना घोटाला उसकी आज दर्ज की गई एफआईआर का हिस्सा है। इसलिए दोनों मामलों को सीधे एक ही घोटाला बताना जल्दबाजी होगी।

जालंधर ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन जगतार सिंह संघेडा इसकी शिकायत कर थक चुके हैं हालाँकि वह आप के सीनियर नेता है लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गयी क्योंकि घोटालों का मास्टर माइंड सीबीआई की एफआईआर के मुख्यारोपी का राइट हैंड बन चुका था। संघेडा की आवाज दब गयी।

जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में पहले सामने आए सूर्य एन्क्लेव एक्सटेंशन भूमि अधिग्रहण मामले में 94.97 एकड़ जमीन से जुड़े मुआवजे में करीब 5.49 करोड़ रुपये के कथित गबन की जांच विजिलेंस ब्यूरो कर चुका है।

इस मामले में फर्जी लाभार्थियों के नाम पर मुआवजा जारी करने, जाली दस्तावेज तैयार करने और ट्रस्ट अधिकारियों तथा अन्य लोगों की कथित मिलीभगत के आरोप लगे थे। इसी मामले में कई गिरफ्तारियां भी हुईं और बाद में एक पूर्व पीसीएस अधिकारी की भूमिका की भी जांच हुई।

अब सवाल यह है कि क्या आज की सीबीआई जांच में सामने आए कथित संपर्कों और जालंधर में पहले से जांच के घेरे में रहे ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बीच कोई प्रत्यक्ष कारोबारी, व्यक्तिगत या प्रशासनिक संबंध सामने आते हैं?

खास तौर पर यदि ट्रस्ट के कथित घोटाले से जुड़े किसी व्यक्ति का आज सीबीआई द्वारा नामजद किए गए आरोपियों या उनके करीबी सहयोगियों से पुराना संपर्क रहा है, तो यह जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण जांच बिंदु हो सकता है।

सिर्फ दोस्ती या जान-पहचान अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है, लेकिन यदि दस्तावेजी लेन-देन, फोन संपर्क, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन अथवा सरकारी फैसलों में किसी प्रकार की समान कड़ी सामने आती है, तो दोनों मामलों के बीच संबंध की जांच का आधार मजबूत हो सकता है।

सीबीआई की आज की एफआईआर में राजबीर घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं। एजेंसी ने अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा है। सीबीआई का कहना है कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।