फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर ने मिनिमली इनवेसिव एडवांस्ड ‘रेज़ूम थेरेपी’ का इस्तेमाल करके प्रोस्टेट के बहुत ज़्यादा बढ़ने से परेशान 62 साल के मरीज़ का सफल इलाज किया

इस नए तरीके से बिना बड़ी सर्जरी के पेशाब रुकने की गंभीर समस्या से राहत मिलती है, पेशाब का बहाव सामान्य हो जाता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है

जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो: 2026: फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर के डॉक्टरों ने ‘रेज़ूम वॉटर वेपर थेरेपी’ नाम के एक आधुनिक और आसान इलाज से 62 साल के एक मरीज़ का सफलतापूर्वक इलाज किया। यह मरीज़ प्रोस्टेट के बहुत ज़्यादा बढ़ने के कारण पेशाब से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा था। इस मरीज का इलाज करने वाले टीम का नेतृत्व डॉ. हरप्रीत सिंह, एसोसिएट कंसल्टेंट, यूरोलॉजी विभाग, फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर ने किया।

मरीज़ ने अस्पताल आकर शिकायत की कि वह अपना ब्लैडर (मूत्राशय) पूरी तरह खाली नहीं कर पा रहा है। क्लिनिकल जांच के बाद, टेस्ट में पीएसए का स्तर सामान्य पाया गया (जो प्रोस्टेट से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की जांच करता है), और अल्ट्रासाउंड स्कैन से पुष्टि हुई कि उसका प्रोस्टेट बढ़कर 32 सीसी हो गया था। इससे गंभीर रुकावट पैदा हो रही थी और पेशाब का बहाव बहुत धीमा हो गया था।

पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय, यूरोलॉजी टीम ने ‘रेज़ूम थेरेपी’ को चुना – यह एक तेज़ इलाज है जिसमें प्रोस्टेट के अतिरिक्त टिश्यू को सिकोड़ने के लिए प्राकृतिक भाप (पानी की भाप) का इस्तेमाल किया जाता है। ब्लैडर को आराम देने और ठीक होने में मदद के लिए एक हफ़्ते तक एक अस्थायी ट्यूब लगाई गई। ट्यूब हटाने के बाद, मरीज़ आसानी से और आराम से पेशाब करने लगा; ब्लैडर में पेशाब नहीं बचता था और उसका बहाव तेज़ व स्वस्थ था।

मरीज के इलाज की पूरी प्रक्रिया 10 मिनट के भीतर पूरी हो गई और मरीज़ उसी दिन अपने घर चला गया। ठीक होने की प्रक्रिया के दौरान पेशाब निकालने के लिए लगभग एक हफ़्ते तक एक पतली ट्यूब (कैथेटर) लगी रही। कुछ ही हफ्तों में वह फिर से सामान्य रूप से पेशाब करने लगा, अच्छी नींद लेने लगा और उसे किसी दवा की ज़रूरत नहीं रही।

इस मामले पर बात करते हुए, डॉ. हरप्रीत सिंह, एसोसिएट कंसल्टेंट, यूरोलॉजी विभाग, फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर ने कहा कि “कई पुरुष सालों तक इन लक्षणों के साथ जीते हैं, यह सोचकर कि ये उम्र बढ़ने का ही एक हिस्सा हैं। इस मरीज़ पर दवाएं असर करना बंद कर चुकी थीं, और उसकी नींद व रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर बुरा असर पड़ रहा था। ‘रेज़ूम’ के ज़रिए हमने बिना बड़ी सर्जरी और बिना उसकी सेक्सुअल हेल्थ पर असर डाले, एक ही आसान प्रक्रिया में उसका इलाज किया। कुछ ही हफ्तों में वह लक्षणों से मुक्त हो गया और उसे दवाओं की ज़रूरत नहीं रही।”

पारंपरिक प्रोस्टेट सर्जरी (टीयूआरपी) के विपरीत, ‘रेज़ूम’ सेक्सुअल हेल्थ को सुरक्षित रखते हुए लक्षणों से राहत देता है। पांच साल की स्टडीज़ से पता चलता है कि इस इलाज के बाद मरीजों में लक्षणों में 48% और यूरिन के बहाव में 49% सुधार हुआ है; साथ ही, इरेक्टाइल प्रॉब्लम का कोई नया मामला सामने नहीं आया और स्खलन से जुड़े साइड इफ़ेक्ट का जोखिम भी बहुत कम रहा।

डॉ. अंकुश मेहता, फ़ैसिलिटी डायरेक्टर, फ़ोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर ने कहा कि “प्रोस्टेट का इलाज अब ऐसे आसान तरीकों की ओर बढ़ रहा है जिनसे मरीज़ जल्दी ठीक हो सकें और एक बेहतर जीवन जी सकें। ‘रेज़ूम’ बढ़े हुए प्रोस्टेट की समस्या से जूझ रहे पुरुषों को एक असरदार और उसी दिन इलाज वाला विकल्प देता है, जिसमें पारंपरिक सर्जरी जैसी तकलीफ़ और ठीक होने में लगने वाला लंबा समय नहीं होता। फ़ोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर में हम इस क्षेत्र में ऐसे आधुनिक इलाज के विकल्प उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”