लॉटरी विभाग में करोड़ों की धांधली का आरोप, चन्नी बोले- 200 करोड़ से घटकर 45 करोड़ रह गया राजस्व

AAP सरकार पर निशाना; बाहरी ठेकेदारों के सिंडिकेट, टैक्स चोरी और लॉटरी विक्रेताओं के शोषण के लगाए गंभीर आरोप, CBI जांच की मांग

जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो। पंजाब सरकार के वित्त विभाग के अधीन आने वाले लॉटरी विभाग को लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चन्नी के मुताबिक, लॉटरी व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

चन्नी ने दावा किया कि पिछली सरकारों के दौरान लॉटरी से पंजाब को हर साल 200 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन अब यह घटकर करीब 45 करोड़ रुपये रह गया है। उन्होंने लॉटरी कारोबार में बाहरी ठेकेदारों के कथित सिंडिकेट, टैक्स चोरी और गरीब विक्रेताओं के शोषण की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है।

डिफॉल्टर ठेकेदार को बार-बार टेंडर देने का आरोप

चन्नी के आरोपों के अनुसार, पहले पंजाब में लॉटरी का संचालन सरकार खुद करती थी। उनका दावा है कि पिछले साढ़े चार वर्षों से एक ही बाहरी ठेकेदार, जिसे उन्होंने मार्टिन बताया, अलग-अलग नामों से कंपनियां बनाकर टेंडर हासिल कर रहा है। चन्नी ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति को पहले डिफॉल्टर घोषित किए जाने के बावजूद उसे दोबारा टेंडर दिए गए।

 

उनके मुताबिक, टेंडर की राशि पहले करीब 80 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में घटाकर 60 करोड़ रुपये किया गया और अब कथित तौर पर तीसरी कंपनी के नाम से वही सिंडिकेट कारोबार चला रहा है।

 

सिक्किम-नागालैंड की लॉटरी बेचने का आरोप

 

चन्नी ने आरोप लगाया कि पंजाब के स्थानीय कमीशन एजेंटों पर पंजाब की लॉटरी के बजाय सिक्किम और नागालैंड की लॉटरी बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि इसी व्यवस्था के जरिए बड़े स्तर पर टैक्स चोरी की जा रही है और इसका सीधा असर पंजाब के राजस्व पर पड़ रहा है।

 

बंडलिंग सिस्टम पर भी उठाए सवाल

 

आरोपों के मुताबिक, 1,400 रुपये के एक बंडल में 200 टिकट होते हैं और इन टिकटों पर एक ही नंबर छपा होता है। चन्नी ने दावा किया कि टीवी पर टिकट की कीमत 7 रुपये दिखाई जाती है, जबकि सरकार के खाते में कथित तौर पर केवल 10 हजार रुपये की लॉटरी का टैक्स दिखाया जाता है, जबकि विजेता को 20 लाख रुपये तक का इनाम दिया जाता है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित व्यवस्था से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच रहा है और इसका लाभ बाहरी ठेकेदार तथा उससे जुड़े लोगों को मिल रहा है।

 

लॉटरी विक्रेताओं का कमीशन घटाने का भी आरोप

 

पूर्व मुख्यमंत्री ने गरीब लॉटरी विक्रेताओं के कमीशन को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, पिछली सरकारों के समय घर-घर जाकर टिकट बेचने वाले विक्रेताओं को 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था, जिसे मौजूदा सरकार ने घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया। चन्नी ने कहा कि इससे विक्रेताओं को आर्थिक नुकसान हुआ है।

 

CBI जांच से पूरे नेटवर्क की जांच की मांग

 

चन्नी ने कहा कि लॉटरी कारोबार में कथित कलर स्कीम, बंडलिंग सिस्टम और बाहरी राज्यों की लॉटरी से जुड़े मामलों की गहराई से जांच जरूरी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे सरकारी राजस्व को हो रहे नुकसान और कथित सिंडिकेट की भूमिका सामने आ सकती है।

 

हालांकि, ये आरोप राजनीतिक तौर पर लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र जांच अथवा संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही इनकी पुष्टि हो सकेगी।