ईरान-अमेरिका शांति समझौते की ओर बड़ा कदम! तेल हुआ सस्ता, बाजार पर पड़ेगा असर 

वॉशिंगटन/तेहरान, रोजाना भास्कर ब्यूरो। तेहरान और वॉशिंगटन के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर दुनिया की नजरें टिकी हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने संकेत दिए हैं कि शत्रुता समाप्त करने, नाकाबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों की रिहाई की अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के सत्यापन के बाद ही अंतिम समझौते पर आगे बढ़ा जाएगा। माना जा रहा है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

📉 तेल बाजार में बड़ी नरमी
समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब 84 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI लगभग 81 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद बढ़ गई है।

🚢 होर्मुज जलडमरूमध्य पर सबसे बड़ी सहमति
दुनिया की करीब 20% तेल और गैस आपूर्ति जिस होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती है, उसे 30 दिनों के भीतर फिर से खोलने पर सहमति बनी है।

हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि नियंत्रण उसी के पास रहेगा और जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाएगा। अमेरिका बिना शर्त आवाजाही चाहता था, लेकिन इस मुद्दे पर उसे नरम रुख अपनाना पड़ा है।

भारत को फायदा या नुकसान?
होर्मुज खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने और वैश्विक कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है, जिससे ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की लागत कम हो सकती है।

लेकिन जहाजों पर सेवा शुल्क लागू होने से भारत के लिए आयात लागत पूरी तरह कम होगी, इसकी गारंटी नहीं है। चूंकि भारत अपनी बड़ी तेल जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है, इसलिए समझौते का असर मिश्रित रह सकता है।

दुनिया की निगाहें अंतिम हस्ताक्षर पर
107 दिनों से जारी संघर्ष के बाद संभावित समझौता मध्य-पूर्व में स्थिरता की नई उम्मीद लेकर आया है। अब सबकी नजरें उस अंतिम दस्तावेज पर हैं, जो तय करेगा कि इस समझौते में कौन झुका और किसे कितना लाभ मिला।

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