चंडीगढ़, रोजाना भास्कर ब्यूरो: ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट किए गए 11 पंजाबियों को वीरवार को पुलिस ने सुरक्षित उनके परिजनों के हवाले कर दिया। कुल 15 भारतीयों को वापस भेजा गया था, जिनमें से अधिकांश पंजाब से संबंधित हैं। घर लौटने पर जहां परिवारों में राहत देखने को मिली, वहीं कई घरों में मायूसी भी छाई रही।
सपनों से हकीकत तक: विदेश से लौटे युवाओं की कहानी
डिपोर्ट होकर लौटे लोगों में जसवंत सिंह, अंगेज सिंह, सतिंदरजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, जगजीत सिंह, जसप्रीत सिंह, निर्मल सिंह, श्रुति शर्मा, रणजीत सिंह, हरप्रीत सिंह और गगनदीप सिंह शामिल हैं। सभी को पुलिस सुरक्षा के बीच उनके घरों तक पहुंचाया गया।
16 लाख खर्च, फिर भी टूटा सपना
समराला के गांव मुश्काबाद के रहने वाले 35 वर्षीय रणजीत सिंह की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया। परिवार ने 2014 में करीब 16 लाख रुपये खर्च कर उसे स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया भेजा था। बेहतर भविष्य की उम्मीद में भेजे गए बेटे की वापसी ने परिवार की उम्मीदों को झटका दिया।
कानूनी मामलों ने बढ़ाई मुश्किलें
सूत्रों के मुताबिक, रणजीत सिंह पर ऑस्ट्रेलिया में ड्रग्स और अन्य मामलों से जुड़े आरोप थे, जिसके चलते उसे डिपोर्ट किया गया। हालांकि, परिवार का कहना है कि उनका बेटा निर्दोष है और वीजा से जुड़ी तकनीकी वजहों के कारण उसे वापस भेजा गया।
खामोशी में छुपा दर्द
परिवार के कई सदस्यों ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया, लेकिन पिता जसबीर सिंह की आंखों में बेटे को लेकर चिंता और दर्द साफ नजर आया।
प्रशासन की कार्रवाई जारी
पुलिस ने सभी डिपोर्ट किए गए व्यक्तियों को उनके परिवारों के सुपुर्द कर दिया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और निगरानी को लेकर संबंधित एजेंसियां सतर्क हैं।















