भंडारी ने हार कर भी नहीं लिया सबक, लोकसभा में नहीं मनाया रूठों को… आखिरकार अटवाल को ही उठाना पड़ा यह कदम… यह दिग्गज नेता चल रहे हैं अपनी टीम अलग लेकर…

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जालंधर, रोज़ाना भास्कर (हरीश शर्मा). पंजाब के विधानसभा चुनावों में जालंधर नार्थ से 32 हजार की करारी हार का मुंह देखने वाले भाजपा के पूर्व विधायक केडी भंडारी व उनकी टीम में अभी सुधार नहीं हुआ है। लोकसभा चुनावों कोे लेकर भी भंडारी ने उन रूठों को मनाना मुनासिब नहीं समझा, जो 2017 में उनसे नाराज थे। आखिरकार चरणजीत सिंह अटवाल को यह महसूस हुआ कि भाजपा का एक बड़ा गुट नाराज होकर घर बैठा है तो उनहोंने इन नेताओं के साथ मीटिंग कर उनको घरों से निकाला। अभी भी यह भाजपा नेता भंडारी के बैनर तले काम करने के लिए तैयार नहीं है।
2007 में भंडारी को विधानसभा तक पहुंचाने वाले टकसाली भाजपा नेता रवि महेंदरू, विपिन गोल्डी, चंद्र सैनी, गोपाल पेठे वाला, इंद्र कबीर नगर, सुर्दशन मोगिंया समेत कई ऐसा सीनियर नेता हैं, जिनको केडी भंडारी ने दर किनार कर​ दिया था। क्योंकि भंडारी के इर्द गिर्द नई टीम ने कब्जा कर लिया। आखिरकार टकसाली भाजपा नेता धीरे धीरे साइडलाइन होते गए। विपिन गोल्डी तो वह युवा था, जो दिन रात भंडारी के साथ उसकी गाड़ी में रहता था और भंडारी को विधानसभा तक पहुंचाने के लिए पूरी जान लगा दी थी।
2017 में नाराज नेताओं की संख्या बढ़ती चली गयी और एक पूरा गुट बन गया लेकिन भंडारी ने इनको मनाने की जहमत नहीं उठायी, नतीजन टकसाली भाजपा नेताओं ने फील्ड में पूरी सक्रियता से वर्क नहीं किया और भंडारी रेकार्ड तोड़ मतों से युवा बावा हेनरी से हार गए। हेनरी परिवार का दोबारा नार्थ में उदय हो गया। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी भंडारी ने इन भाजपा नेताओं को अपनी तरफ लाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया उल्टा टकसाली भाजपा नेताओं व भंडारी के बीच दूरियां बढ़ती चली जा रही हैं। 2019 में लोकसभा चुनाव भी आ गये और प्रचार के दौरान अटवाल को पता चला कि टकसाली भाजपा गुट काफी हाताश है तो उन नेताओं की अटवाल से अलग मीटिंग हुई और अटवाल ने सभी की पीठ पर हाथ रखा कि आप फील्ड में वर्क करो।