जालंधर में 84 शिक्षकों की सैलरी पर रोक! ड्रग सर्वे ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, शिक्षक संगठनों ने खोला मोर्चा

जालंधर, रोजाना भास्कर ब्यूरो। पंजाब सरकार के ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वे में ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले 84 सरकारी स्कूल शिक्षकों के जून महीने के वेतन पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन ने 23 और 24 जून को अलग-अलग पत्र जारी कर संबंधित डीडीओ और स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बिना इन शिक्षकों का वेतन जारी न किया जाए। साथ ही पूर्व अनुमति के बिना उनकी उपस्थिति दर्ज न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रशासन के अनुसार इन शिक्षकों को सर्वे के लिए एन्यूमरेटर नियुक्त किया गया था और उन्हें 11 जून तथा 23 जून को चुनाव शाखा कार्यालय में रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि आदेश, कारण बताओ नोटिस और कई बार फोन पर सूचना देने के बावजूद शिक्षक ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इसे सरकारी आदेशों की अवहेलना और लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की गई है।

हालांकि इस फैसले का शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। सरकारी अध्यापक यूनियन के जिला प्रधान करनैल सिंह फिल्लौर ने कहा कि सरकार ने पहले सर्वे में भागीदारी को स्वैच्छिक बताया था, लेकिन अब शिक्षकों पर दबाव बनाने के लिए वेतन रोकने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

वहीं डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला सचिव अवतार लाल ने आरोप लगाया कि शिक्षकों और स्कूल मुखियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और ड्यूटी न करने वालों को धमकियां दी जा रही हैं।

वेतन रोक का सामना कर रहे शिक्षक स्वर्ण सिंह ने बताया कि उन्होंने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कर ड्यूटी से छूट मांगी थी। इसके बावजूद उन्हें लगातार फोन कर ड्यूटी जॉइन करने और वेतन रोकने की चेतावनी दी जा रही है।

इस बीच अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) दिव्या पी ने कहा कि मामले की समीक्षा की जाएगी और शिक्षकों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।

उन्होंने बताया कि जालंधर में अब तक केवल 40 प्रतिशत सर्वे ही पूरा हुआ है और अभी भी करीब 300 एन्यूमरेटरों की कमी बनी हुई है। इस कमी को पूरा करने के लिए उन स्कूलों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जहां अभी तक सर्वे का कार्य शुरू नहीं हुआ है।

प्रशासन और शिक्षक संगठनों के बीच इस मुद्दे को लेकर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और शिक्षकों के साथ होने वाली बातचीत पर टिकी हैं।