चंडीगढ़-दिल्ली, रोजाना भास्कर ब्यूरो। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पार्टी में एकजुटता बनाए रखने के लिए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। पार्टी हाईकमान अब नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।

माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में खींचतान खत्म कर सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की कवायद के तहत यह कदम अहम है।
राजा वड़िंग ने अप्रैल 2022 में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद संभाला था। इसके बाद से ही पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।
हाईकमान ने जुलाई में वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई थी।
उधर सितंबर में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में संगठनात्मक स्तर पर एक और बड़ा बदलाव करते हुए सचिन पायलट को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया था। उन्होंने भूपेश बघेल की जगह जिम्मेदारी संभाली। पायलट के सामने पार्टी के विभिन्न गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने की चुनौती है।
वड़िंग के इस्तीफे की पेशकश को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर चन्नी के साथ-साथ प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, विजय इंदर सिंगला और परगट सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक भूमिका है। ऐसे में हाईकमान के सामने नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन के साथ सभी गुटों को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर जल्द फैसला हो सकता है। पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला, जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह और गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने संगठन में एकजुटता कायम करने के साथ चुनावी तैयारियों को गति देने की दोहरी चुनौती है।
राजा वड़िंग ने अपना इस्तीफा हाईकमान को भेज दिया है। जल्द हाईकमान इस पर अंतिम फैसला लेगी।












