TMC में महाभारत! ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने का दावा, अभिषेक निलंबित; पार्टी फंड और चुनाव चिन्ह पर छिड़ी जंग

कोलकाता, रोजाना भास्कर ब्यूरो: पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब खुली बगावत में बदलता नजर आ रहा है।

बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को “असली टीएमसी” बताते हुए ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने और अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने का दावा किया है। इतना ही नहीं, पार्टी के चुनाव चिन्ह और करोड़ों रुपये के फंड को लेकर भी संघर्ष तेज हो गया है।

ऋतब्रत गुट ने न्यू टाउन के एक होटल में बैठक कर हावड़ा मध्य के विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित किया। गुट का दावा है कि बैठक में 60 विधायक और कोलकाता नगर निगम के 70 पार्षद शामिल हुए।

बागी नेताओं का आरोप है कि फरवरी 2022 के बाद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन नहीं किया गया, जिससे टीएमसी में “संवैधानिक संकट” पैदा हो गया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था।

अब बागी गुट ने पलटवार करते हुए नया संगठन घोषित कर दिया है, जिससे पार्टी के भीतर टकराव और गहरा गया है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि टीएमसी अब कई गुटों में बंटती दिखाई दे रही है। एक ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल संगठन है, तो दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी का गुट खुद को “असली टीएमसी” बताकर विधानसभा में विपक्षी दल होने का दावा कर रहा है।

वहीं कुछ सांसदों के अलग राजनीतिक रुख अपनाने की भी चर्चाएं तेज हैं।

इस सियासी घमासान के बीच पार्टी के चुनाव चिन्ह और करीब 1,100 करोड़ रुपये के फंड पर भी विवाद गहराने की संभावना है। बागी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे चुनाव चिन्ह पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

उधर, टीएमसी ने अपने तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का कहना है कि करीब 440 करोड़ रुपये जमा वाले इन खातों को किन परिस्थितियों में फ्रीज किया गया, इसकी न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए।

विवाद तब और बढ़ गया जब पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने बैंक को पत्र लिखकर खातों के संचालन पर सवाल उठाए और उन्हें फ्रीज करने की मांग की।

अब बंगाल की राजनीति की नजर इस बात पर टिकी है कि टीएमसी के भीतर जारी यह सियासी संग्राम किस मोड़ पर जाकर रुकेगा।

नेतृत्व, संगठन, चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड को लेकर शुरू हुई यह लड़ाई आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।